शोंक से शुरू होकर कब नशा आदत बन गया पता ही नहीं चला और वर्ष २०१४ में नशे की चपेट में आ गया| समय रहते परिवार एवं दोस्तों के प्रोत्साहन से मेने व्यायाम, संगीत, टॉक थेरेपी का अभ्यास शिरोधारा से लेना शुरू किया| जिसकी सहायता से मैं नशे की इस दलदल से बाहर आने में सफल हुआ|
कँवर सिधु
श्री गंगानगर